भारत जिसको आजादी बड़ी मुश्किल से मिली है जिसने क ई वीरों को खोकर आजादी पायी है ये आजादी हमे ऐसे ही नहीं मिली इसके लिए अनेक वीरों ने अपनी जान गंवाई है जब हमने आजादी पायी है.
जहाँ कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी
भारत माता एक कह लायी है,
किसी ने दिया जय जवान जय किसान का नारा,
तो किसी ने करो या मरो के लिए
हर वीर ने अपनी जान गंवाई है.
जहाँ अनेकता में एकता की बात है कि जाती जिसके लिए भारत ने पूरे विश्व में अपनी पहचान बनायी है.
स्वाधीनता के लिए उसने बहुत चोटें खायी है.
आज समकालीन समय में भारत में जब आत्मनिर्भरता का नारा तेजी से चल रहा है तब हम सभी नागरिकों को इसका अर्थ समझना होगा अगर हम विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रहे हैं तो हमें तकनीक को समझना होगा.
और हम पत्रकारिता के क्षेत्र में है तो हमें लिखना और बोलने के अलावा अपने ज्ञान को और बढ़ाना होगा.
आज इस पर बात करते हुए मुझे महात्मा गांधी का वो कथन याद आ गया जब उन्होंने कहा था कि भारत ने अगर अग्रेजों से आजादी पा भी ली तब भी वो आजाद तब तक नहीं कहलाता जब तक कि वो अपने विचार आचार व्यवहार में विदेशों की निर्भरता खत्म नही कर देता है.
जिसका उदाहरण गांधी के काल में ही देखने को मिलता है जिसमें गांधी विदेशी कपड़ों का बहिष्कार कर देशी कपड़े को बढ़ावा देने को कहते हैं वो स्वयं चरखा चलाते हैं .
आज हमें एक फिर उस गांधी के विचारों को समझने की जरूरत है.
और एक कदम आगे चलने के लिए अपने को सशक्त करने की जरूरत है ये एक दिन में नहीं होगा इसके लिए हम सभी को बहुत मेहनत की जरूरत है.
क्योंकि स्वाधीनता का असली मतलब अपने को किसी का गुलाम न रखना है.
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