जो अपनी माँ देवकी की आठवीं संतान थे पौराणिक कथा के अनुसार कृष्ण का जन्म मुख्यतः अपने मामा को मारने के लिए हुआ था.
महाभारत के समय श्री कृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे
जब अर्जुन अपने संगे सम्बन्धी से युद्ध करने को मना कर देते हैं तब कृष्ण अर्जुन को गीता का मर्म बतते है और कहते हैं कि
"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत :
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् "
जिसका अर्थ हे अर्जुन, जब जब धर्म की ग्लानि - हानि होगी और अधर्म में वृद्धि होती है, तब तब मैं श्रीकृष्ण धर्म के अभ्युत्थान के लिए स्वयं की रचना करता हूँ अर्थात मैं अवतार लेता हूँ.
आज वर्तमान समय की परिस्थितियों में ये गीत आज की दशा को स्पष्ट रूप से कृष्ण के ( गोविन्द ) बताता है.
आज कलयुग मे ले के अवतार ओ गोविन्द
अपने भक्तों की सुनले पुकार हो गोविन्द
अपने भक्तों की सुनले पुकार हो गोविन्द

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