आज हम उस लेखन को ज्यादा महत्व देते हैं जिनके लेखन में समाज की सच्चाई हो.
कहते हैं कि साहित्य समाज का आईना होता है जिसे प्रेमचंद के लेखन से देखा जा सकता है.
जिन्होंने अपने लेखन के जरिये जहाँ ओर किसानों की समस्या पर गोदान लिखा तो वही दूसरी ओर नारी की समस्या पर निर्मला, बूढ़ी काकी, कफन, सेवासदन, मंगलसूत्र जैसी रचना लिखी जो आज के समय में भी पढ़ी जाती है.
उनके लेखन पर ये उर्दू की शायरी बहुत सही सी लगती है
"कौन सी बातें कब कही जाती
जिनको है सलीका केवल उनकी, बातें सुनी जाती "
आज जब हर कोई अपने लेखन से कुछ अलग लिखने की सोच रहा है ऐसे में उसे प्रेमचंद के लेखन को जरूर पढ़ना चाहिए जिनके लेखन में एक अलग ही जादू है.
जिनकी रचना मुख्यता गाँव के परिवेश पर आधारित है.

Comments