Skip to main content

आज भी है मायने प्रेमचंद के लेखन के


आज हम उस लेखन को ज्यादा महत्व देते हैं जिनके लेखन में समाज की सच्चाई हो.

कहते हैं कि साहित्य समाज का आईना होता है  जिसे प्रेमचंद के लेखन से देखा जा सकता है.

जिन्होंने अपने लेखन के जरिये जहाँ  ओर   किसानों की समस्या पर गोदान लिखा तो वही दूसरी ओर  नारी की समस्या पर निर्मला, बूढ़ी काकी, कफन, सेवासदन, मंगलसूत्र जैसी  रचना लिखी जो आज के समय में भी पढ़ी जाती है.

उनके लेखन पर  ये उर्दू की शायरी बहुत सही सी लगती है

"कौन सी बातें कब कही जाती

जिनको है सलीका केवल उनकी, बातें सुनी जाती "

आज जब हर कोई  अपने लेखन से  कुछ अलग लिखने की सोच रहा है ऐसे में उसे प्रेमचंद के लेखन को जरूर पढ़ना चाहिए जिनके लेखन में एक अलग ही जादू है.

जिनकी रचना मुख्यता गाँव के परिवेश पर आधारित है.



Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..