स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद जिनकी आज हम सब को एक बार फिर आवश्यकता है जिनके विचार हमारे जीवन में एक ऐसी जड़ीबूटी की तरह है जो की व्यक्ति की सभी चोटों को भरा देता है उनका ये कथन अपने आप में संसार के हर सत्य को प्रकट करता है
"सम्पूर्ण शास्त्र में जो है तुम्हारे भीतर है वरन्
उसकी अपेक्षा हजार गुना अधिक है"
आज के परिपेक्ष्य में इसका अर्थ यहाँ है आज सारा ज्ञान तुम्हारे अंदर है तुम्हें उसे समझने की जरूरत है.
इसमें हम ऐसे समझ सकते हैं कि जीवन की आधी लड़ाई तो हमारी दृढ़ निश्चय पर निर्भर करती है कि हमारा उस काम के प्रति कितना जूनून है .
समकालीन समय हम इसलिए परेशान नहीं है कि हमारे पास बहुत सारी समस्या है बल्कि हम इसलिए परेशान है क्योंकि हम कई ऐसी चीजों को ढो रहे हैं जो हमारे लिए महत्व ही नहीं रखती जिसका परिणाम या होता है कि हम समस्याओं में उलझते चले जाते हैं और उसका कोई अंत नहीं होता है .

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