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बल ही जीवन है दुर्बलता ही मरण है

स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद जिनकी आज हम सब को एक बार  फिर आवश्यकता है जिनके विचार हमारे जीवन में एक ऐसी जड़ीबूटी की तरह है जो की व्यक्ति की सभी चोटों को भरा देता है उनका ये कथन अपने आप में संसार के हर सत्य को प्रकट करता है

"सम्पूर्ण शास्त्र में जो है तुम्हारे भीतर है वरन्

उसकी अपेक्षा हजार गुना अधिक  है"

आज के परिपेक्ष्य में इसका अर्थ यहाँ है आज सारा ज्ञान तुम्हारे अंदर है  तुम्हें उसे समझने की जरूरत है.

इसमें हम ऐसे समझ सकते हैं कि जीवन की आधी लड़ाई तो हमारी दृढ़ निश्चय पर निर्भर करती है कि हमारा उस काम के प्रति कितना जूनून है .

समकालीन समय हम इसलिए परेशान नहीं है कि हमारे पास बहुत सारी समस्या है बल्कि हम इसलिए परेशान है क्योंकि हम कई  ऐसी चीजों को ढो रहे हैं जो हमारे लिए महत्व ही नहीं रखती  जिसका परिणाम या होता है कि हम समस्याओं में उलझते चले जाते हैं और उसका कोई अंत नहीं होता है .





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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..