फेरीवाला


आज बड़े दिनों के बाद सड़क  पर फेरीवाला देखा इस  लॉकडाउन में व़ो जाने कहाँ गायब हो गया था

मानो कि वो ईद का चांद हो गया हो.

मुझें आज भी  अच्छी तरह से याद है कि जब हम छोटे थे तो  किस तरह फेरीवाले के आने पर मम्मी से पैसे लेकर घर से दौड़  लगाते थे और जब मम्मी  पैसे  नहीं देती थी तो रोने का बहाना करते थे.

आज  के समय जब किसी छोटे बच्चे को फेरीवाले के पीछे दौड़ते देखती हूँ तो फिर से अपना बचपन याद  सा आ जाता है 

"  वर्तमान समय में जब हम लोग  हर चीज के लिए   मॉल  और मार्केट पर निर्भर हो ग ए है तो ऐसे में फेरीवाला का व्यापार बंद सा होगा गया है हमारा ध्यान इनकी ओर भी जाना चाहिए हमारी तरह वे लोग भी अपना पेट भरने के लिए कड़ी धूप में वस्तु बेचने आतें है  ".



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