मेरी क्या इतनी गलती है कि मैं मजदूर हूँ आज में मजदूर से ज्यादा मजबूर हो चुका हूँ शायद इसलिए कभी मैं ट्रेन पर सोते वक्त कुचला
जाता हूँ .
जाता हूँ .
अब तो मुझे लगता है कि मुझें एक कैदी सा बना दिया है बस अंतर इतना है कि मुझें बिना जुर्म के ही सजा ऐ "भूख" से मौत मिलती है तो कभी लोगों से दो वक्त की रोटी दान में मिलती है लेकिन इसमें मेरा क्या कसूर.
मैं कमाने के लिए गाँव से शहर आया था मुझे क्या मालूम था कि यहाँ इनाम में अकबर की तरह आज अनारकली को नहीं बल्कि हर मजदूर को' सजा ए मौत' मिलेगी .
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