पिता का पुत्री पर विश्वास दिखती है " दंगल "



"म्हारी छोरियां छोरों  से कम  है के"

 दंगल मूवी मुख्य रूप से 
कामनवेल्थ
 रेसलिंग में  गोल्ड जीतने  वाली पहली भारतीय महिला गीता फोगाट की कहानी पर आधारित है.
इस मूवी में पिता अपने सपने को पूरा अपनी बेटियों के 
द्वारा करता है जिस गाँव में लड़कियां को 14 साल की उम्र में विवाह कर दिया जाता है  ऐसे उस गाँव में गीता फोगाट और बबीता जैसी बेटियां अपने पिता की मेहनत से उस गाँव को गलत साबित किया 'कि पहलवानी केवल लड़के
  नहीं बल्कि लड़कियां भी कर सकती है' इन लड़कियों के जीवन में "म्हारी छोरियां छोरों  से कम  है के" बहुत सूट करता है.



इस मूवी का वो डायलाॅग हम सब को प्रेरित करता है कि " तेरे हारने पर  तुझें गलियां देने वाले हजार लोग आऐगे  लेकिन तुझें सर्पोट करने वाला कोई भी नहीं ".
इस मूवी के हर डायलॉग बहुत ही सही ढंग से सभी कलाकार ने  बोले है इस मूवी की स्किप्ट बहुत अच्छी लिखी है जिसमें आमिर खान की एक्टिंग ने चार चांद लगा दिए है.
इस मूवी का गान  है- जो सबकी आंखों में आंसू ला देता है


"नैना जो सांझ खवाब देखते थे

नैना... बिछड़ के आज रो दिए है यूँ

नैना... जो मिलके रात जागते थे

नैना... सेहर में पलकें मीचते है यूँ"




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