जाने कहाँ गये वो दिन


      आज जहाँ  केवल  हम अपने घर पर बैठने को मजबूर है सारी चीजें इस समय बंद पड़ी है जिस कारण अब तो केवल किताबें ,टीवी, फोन, और विडियो गेम ही हमारा सहारा है.
आज 

लॉक

 डाउन के समय जिसकी हालात सबसे खराब है वो 'मजदूर और कर्मचारी वर्ग है' जो रोज का कमाते और खाते थे जिनके काम अब पूर्ण रूप बंद हो चुका हैं  अब तो उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी सोचना पड़ रहा है  .
आज के समय में जब कुछ लोग भूख से पीड़ित है तो कुछ लोग घर जाने को परेशान
है तो कुछ घर पर बैठे- बैठे बोर हो रहे हैं.
आज आवश्यकता एक बार फिर हमें ये सोचने की है कि हम अपनी कौन सी आदतों को छोड़कर कुछ नया सोचे नया करे " क्योंकि आने वाला कल हमें सोचने का वक्त नहीं देगा".
इस वायरस के बाद हमारी जिंदगी बिल्कुल वैसी नहीं रहेगी जैसी उसे पहले थी हमारी परिस्थिति में  गाना बहुत
 सूट करेगा_

" जाने कहाँ  गए वो दिन

कहते तेरी राह में नजरों को हम बिछऐगे".


Comments