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जाने कहाँ गये वो दिन


      आज जहाँ  केवल  हम अपने घर पर बैठने को मजबूर है सारी चीजें इस समय बंद पड़ी है जिस कारण अब तो केवल किताबें ,टीवी, फोन, और विडियो गेम ही हमारा सहारा है.
आज 

लॉक

 डाउन के समय जिसकी हालात सबसे खराब है वो 'मजदूर और कर्मचारी वर्ग है' जो रोज का कमाते और खाते थे जिनके काम अब पूर्ण रूप बंद हो चुका हैं  अब तो उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी सोचना पड़ रहा है  .
आज के समय में जब कुछ लोग भूख से पीड़ित है तो कुछ लोग घर जाने को परेशान
है तो कुछ घर पर बैठे- बैठे बोर हो रहे हैं.
आज आवश्यकता एक बार फिर हमें ये सोचने की है कि हम अपनी कौन सी आदतों को छोड़कर कुछ नया सोचे नया करे " क्योंकि आने वाला कल हमें सोचने का वक्त नहीं देगा".
इस वायरस के बाद हमारी जिंदगी बिल्कुल वैसी नहीं रहेगी जैसी उसे पहले थी हमारी परिस्थिति में  गाना बहुत
 सूट करेगा_

" जाने कहाँ  गए वो दिन

कहते तेरी राह में नजरों को हम बिछऐगे".


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..