अक्सर हम ये देखते है कि लड़की को जन्म से ही आचार संहिता और कई नियमों का पालन करना पड़ता है उसे ये नहीं करना उसे वो नहीं करना केवल इसलिए क्यों कि वो लड़की है उसे ऐसे बैठना चाहिए .
'वो एक लड़की है उसे लड़की की सीमा में रहना चाहिए.'
'सिमोन न द बोवुआ रसिमो'
दुनिया की पहली नारीवादी चिंतक रही है
जिनका कथन है कि "स्त्री पैदा नहीं होती बनाई जाती है."
**आज भी स्त्री के लिए कई ऐसी बंदिशे है जिसका टूटना अब जरूरी है जिसके लिए किसी और का नहीं बल्कि पूरे नारी समाज का जागरूक होना जरूरी है वो कोई वस्तु नहीं वो भी एक इंसान है अपना हक लेना उसे सीखना होगा.**
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