अक्सर लोग इस एक कशमकश में रहते हैं कि उनकी जिंदगी का क्या उद्देश्य है और वो सच में क्या करना चाहते हैं इसी उलझन में वो उलझे रहते हैं कि उनके सपने क्या है ?
कलाम के अनुसार
" सपनें वो नहीं होते जिन्हें तुम रात को सोते वक्त देखते हो,
सपने तो वो होते हैं जो तुम्हे सोने नहीं देते ".
आज हमारे पास किसी भी चीज़ को जानने के लिए इन्टरनेट मौजूद है लेकिन फिर भी हम बहुत सारी चीजों से अनजान है.
जहाँ एक ओर हम दूसरे के बारे में सब कुछ जान रहे होते हैं वहीं हम खुद से अनजान हो रहे होते हैं.
इस विषय पर बात करते हुए मुझें निर्मला वर्मा का निबंध
" बुध्दिजीवी " याद आ गया जिसमें वो स्पष्ट रूप में कहते हैं कि बुध्दिजीवी वो नहीं होता जो सब कुछ जानता है बल्कि वो होता है जो स्वयं को पूर्ण रूप से जानता समझता है और उसी तरह से काम करता है."
समकालीन समय में आज युवा वर्ग के पास बहुत सारी चीज जानने और समझने को है और वो उन्हें समझ भी रहा है किन्तु सबसे जरूरी जो है वो उसे नहीं सोच रहा है.
** उसे हर दिन पांच मिनट खुद से ये प्रश्न करना चाहिए कि वो कौन है और उसका क्या उद्देश्य है वो क्या बनना चाहता है क्या वो ही काम कर रहा है जिसके उसने सपने देखें थे**.
हर दिन मुश्किलें होगी
हर दिन होगें इम्तिहान
जिंदगी के ,
किन्तु तुम इन मुश्किलों से घबरा न जाना
क्योंकि संघर्ष ही जीवन का दूसरा नाम है
इसलिए कहते है मुसाफिर लोग
जीना इसी का नाम है.
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