Skip to main content

छूट्टी न मिलने वालो के लिए ढेर सारी छूट्टी



  कोरोना वायरस के चलते मुझें एक चीज इन छूट्टियों में जरूर सही लगी कि ऐसे लोग जिन्हें कभी छूट्टी नहीं मिलती थी उनकी अब कुछ दिन की छूट्टी तो हैं जिसके कारण वो अपने परिवार के साथ वक्त बीता रहे है मेरे आस पड़ोस  में ही कई ऐसे लोग है जो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ समय बीता रहे हैं और बच्चों के साथ  गेम्स खेल रहे हैं.और साथ ही इसके चलते लोग वर्क  फ्रोम होम द्वारा अपने आफिस का काम घर पर ही कर रहे हैं और विधार्थियो को उनके कालेज  द्वारा आनलाईन नोट्स और क्लासेस दी जा रही है जिससे वे घर पर  ही अपनी पढ़ाई कर रहे हैं.
राज्य शासन के द्वारा उनको जरूरतमंद वस्तुऐं  प्रदान की जा रही है और उन्हें कोरोना वायरस से बचने की हिदायत दे रही है साथ ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाए गए
जनता क्फ्यू  में  लोगों द्वारा उनके समर्थन में रविवार को पांच बजते ही लोगों ने घंटियाँ और   तालियों  बजाकर उनका समर्थन किया  घंटियों और तालियों    द्वारा   लोगो ने   हमारे लिए दिन रात काम कर रहे कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया.


कोरोना वायरस के चलते दूरदर्शन पर रामायण का प्रसारण शुरू किया गया.जिसके चलते सभी अपने परिवार के संग रामायण देख रहे हैं और सभी रामायण की महत्ता को जान रहे है.

आज रात 9 बजे सभी लोगों ने अपने घर के बाहर और बालकनी में दीपक और मोमबत्ती जलायी
और  एक फिर लोगों की एकजुटता  दिखाई दी.








Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..