आज वो एक्टर भले ही हम सब के बीच से चले गए हो जिनकी फिल्म ने भले ही ज्यादा पुरस्कार न जीते हो लेकिन हमारे दिल तो जीत ही लिए है फिर चाहे बात ' प्रेम रोग " की हो जिसमें विधवा विवाह पर जोर दिया गया था या फिर राम तेरी गंगा मैली की हो जिसके गानो ने तो उस मूवी में चार चांद लगा दिए थे वो गाना तो आज भी हम सब के बीच यही परिस्थितियों को कहता है
" राम तेरी गंगा मैली हो गयी
पतियों के पाप धोते धोते,
आज के समय जहाँ एक तरफ हमारी सबसे पवित्र नदियों में गंगा जो लोगों द्वारा मैली कर दी गयी है ये गाना बिल्कुल सही सा लगता है.
वहीं गाने की ये लाईन आज कहीं क ई लड़कियों की जिंदगी पर यथार्थ सा लगता है
" नदी और नारी हमेशा औरों
का कलंक सर ढोंती
आज भले लोग चाहे जितना भी स्त्री जाति को भला बुरा कहे लेकिन वो इन चीजों से मुकर नहीं सकते चाहे बात नदी की हो या बलिदान स्वरूप स्त्री की दोनों पर अत्याचार कम नहीं है.
आप इन फिल्मों के जरिये स्त्री जाति पर हुए अत्याचार को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं भले ही आज ऋषि कपूर हमारे बीच में ना हो लेकिन उनकी मूवी के माध्यम से वो हमेशा हमारे दिल में रहेंगे
इसी के साथ आज कबीर का दोहा हम सब के जीवन पर सही बैठता है
" माटी कहे कुम्हार से ,क्या तू रौंदे मोहि
एक दिन ऐसा होयगा,
मैं रौदोंगी तोहि"
सारी जिंदगी चाहे लोग जितना भी माटी से दूर रहे लेकिन सबको एक दिन उस मिट्टी में ही मिल जाना है.

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