अगर तुम जिस काम को कर रहे हो और तुम उसकी परीक्षा न दो तो तुम्हारे उस काम की कोई कीमत नहीं है.
जिस तरह हमें अच्छा पहनना और अच्छा खाना पंसद है ठीक उसी तरह हम जो भी काम करते हैं उस सही तरह से करे.
जरूरी नहीं लेखन केवल दर्द में ही किया जाऐं लेखन वो भी कर सकता है जिसके पास विचार हो.
कभी कभी
खुद को दर्द देने वाले को माफ भी कर देना चाहिए.
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