१.किसी भी किताब का जब भी अध्ययन करो तो ऐसे करो कि जब कभी तुम्हें उसे उसने कहने का मौका मिले तो तुम से बेहतर कोई दूसरा न हो.
२.किसी चीज को पढ़ते वक्त इस चीज को दिमाग से बाहर निकल दो कि वो मेरे किसी काम की नहीं क्यों कि तुम्हें नहीं मालूम कि आगे तुम्हें इसकी जरूरत कब पड़ जाऐं.
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