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International women's day special poetry




         



तु ही तू
घर में भी तू बाहर भी तू
दुर्गा भी तू काली भी तू
मेरा आज तू मेरा कल भी तू
सुबह से उठकर
रात के सोने तक कितना काम कर
जाती तू
कभी मां बनकर लोरी सुनती तू
कभी पत्नी बनकर
पति का हाथ बांटती तू
कभी बहन बनकर भाई को सही राहा
दिखती तू।
आज के समय आफिस भी  जाती तू
घर और बाहर दोनों काम
 झट से कर जाती तू।
कभी अग्रेजो को नाको चने चबती  तू
कभी झांसी के लिए
बेटो को पीठ में बिठाकर
पूरा युद्ध लड़ जाती तू
कभी धर्म पत्नी बनकर अपने पति के
प्राण यमराज से भी ले आती तू
कभी कांटों में भी चलकर
पति के साथ चौदह वर्ष
वनवास कर आती तू
तू ही तू।
घर में भी तू बाहर भी तू। 
हमेशा अग्नि परीक्षा में
उत्तीर्ण हो जाती तू
आज के समय में दफ्तर और घर
दोनों में बेहतर काम कर जाती तू
कभी पीवी, सिन्धु तो कभी दुतीचन्द
कभी मैरी काम बनकर स्वर्ण पदक लाती तू
कभी अर्थ शास्त्र की विशेष ज्ञ गीता गोपीनाथ न
बना जाती तू
कभी एक ताकतवर महिला के रूप
में जर्मनी की चांसलर
ऐजेला मार्कल कहलाती तू
कभी अपने संघर्ष को करती
इवाका  जैसी बेटी बना जाती तू
भारत में तू लंदन में भी तू।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..