‌हमेशा पढ़ते रहने की जरूरत है


आज जब तकनीक ने अपने कदम  बहुत अच्छे से जमा लिए है वैश्विक कारण अपने ऊंच स्तर पर पहूंच गया है तब हमें बहुत जरूरी है कि हम दूसरे को शिक्षित करने के लिए पहले खुद शिक्षित हो मैंने अग्नि की उड़ान में पढ़ा था जो मुझे बहुत सही लगा कि एक कमजोर विधार्थी को एक अधिक जानने वाला टीचर कम सीखा पाऐगा  लेकिन एक अधिक जाने वाला विधार्थी एक शिक्षक हो अधिक सीख पाऐगा.
हमेशा हमें कुछ नया सीखने की लालसा होनी चाहिए क्योंकि चीजों समय के अनुसार बहुत जल्दी बदल रही है और अगर हमें आने वाले समय में खुद की पकड़ मजबूत करना है तो हमें किसी भी एक विशेष विषय और एक क्षेत्र में पकड़ा मजबूत करनी होगी दूसरे से तुलना न करके खुद की विशेज्ञता या गुण को अपना हथियार बना होगा.

आज दो महत्वपूर्ण चीजे है पहली आज ही के दिन भगत सिंह और सुखदेव को फांसी मिली थी जिन्हें  एक स्लोगन दिया था " इकंलाब जिन्दाबाद स्वराज्य बाद मुरदाबाद".


दूसरा आज समाजशास्त्री  राजनेता  डा.राम मनोहर लोहिया  जन्मतिथि है मैंने लोहिया जी ज्यादा तो नहीं पढ़ा है लेकिन जितना पढ़ा उतने में ये तो कही ही सकती हूँ उनकी लेखनी यर्थावाद स्पष्ट रूप से झलकता है.

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