सोचने की जरूरत है

7 मार्च को साउथ ऐशियन एक रिपोर्ट आयी जिसमें   9 देशो की  वुमन जर्नलिस्ट को लेकर  एक बड़ा खुलासा किया गया जिसमें सैलरी, वर्कप्लेस ,इन्वायरमेंट   , विज्ञापन ,मीडिया और डिसिजन मैकिग में महिला की स्थिति सही नहीं है। मीडिया और सिनेमा में महिलाओं को सही ढंग से नहीं दिखया जाता ।
केवल बाग्लादेश देश ही एक ऐसा देश है जहाँ पर 75%विश्वविघालय में ये पढ़ाया जाता है कि महिलाओं के  साथ  वर्कप्लेस में कैसा व्यवहार किया जाऐं।
इसमें केवल भारत के 10%विश्वविघालय है जहाँ पर ये सिखाया जाता है कि महिला के साथ वर्कप्लेस पर कैसा व्यवहार किया जाऐं।
समकालीन समय में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है लेकिन अभी भी उनकी संख्या निर्णय लेने में बहुत कम है।
महिलाओं को glass ceiling से निकलना होगा। 

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