क्या आज हम उतनी ही मेहनत कर रहे है जितनी हमें जरूरत है शायद नहीं क्यों कि अभी भी हमें ये वाहम है कि हम बहुत मेहनत कर रहे और इतनी मेहनत में हमें बहुत कुछ मिल जाऐगा अभी भी हम जिस स्थान पर है वहाँ पर हमाने बहुत मेहनत की क ई मुश्किलों का सामना किया है .
तब ही हम इस मुकाम पर पहूंचे है मुझे आपकी इस बात पर अपने मित्र की बात बहुत सही लगी कि अगर हमारे माँ बाप हमें स्कूल ही नहीं भेजते तो शायद हम यहाँ तक नहीं पहुचते आप आज जिस भी स्थिति में है औरों से बेहतर है क्योंकि आपको पूर्ण रूप से इस बात की स्वतंत्रता है कि आप अपने बारे में सोच सके भारत जैसे देश में बहुत से ऐसे लोग है जो आज भी दो वक्त कि रोटी के लिए संघर्ष कर रहे पढ़ाई की तो बात दूर आज हम अपना मनोरंजन करते समय शायद ये भूल जाते हैं कि कितने को हराकर हम इस स्थान पर आऐ और कितने के सपनों वही के वही रह गए मानती हूँ कि आपने भी बहुत संघर्ष किया होगा चाहे पढाई में चाहे लोगों कि बातों और तानो को नजरअंदाज करके खुद को साबित करने के लिए अपने क ई आसू रोऐ होगे तो कोई अपने देश छोड़ कर दूसरे देश आऐ होगे लेकिन तब भी अपने " केवल पढ़ाई बस के लिए इतना संघर्ष न किया होगा जितना नावेल पुरुस्कार लिए विजेता मलाला यूसुफजई ने पढ़ाई के लिए किया और अपने साथ दूसरे का भी भला किया.
आज ये सब लिखते वक्त मेरे मन ये बिल्कुल भी नहीं आ रहा है कि इसे कौन पढ़ेगा क्योंकि सभी लोगों शायद न समझा पांऊ लेकिन कुछ लोग इसे जरूर सीख सकते हैं कि उन्हें अपने साथ कितनी ईमानदारी रखने की जरूरत है .
"आज का समय के वल अपने लिए खर्च करने की जरूरत है".
Comments