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- कितना अजीब है न किसी किताब के पहले पेज को देखते हुए ये मन लेना की उसमें कोई भी स्वाद ही नहीं।
- किताब में कितना अजीब जादू है कि उसमें होते तो काले शब्द ही है लेकिन वो हमें जिदंगी की जल्दी बाजी के बीच कुछ सोचने को रोक देते हैं।
- कुछ को तो पढ़ाते रहने में ऐसा लगता है कि उसे लगतार पढ़ाते ही रहे और अपनी सभी जिज्ञासो को खत्म करे।
- कहानी और उपन्यास की किताब की अलग ही बात होती है जो हमें और आगे पढ़ाने की ओर विवश करती है।
- समय की कीमत किताब सबसे अच्छे तरीके से बतती है एक दो घंटे में ही कितना कुछ ज्ञान देती है।
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