समय समय की बात है कि कभी हम कुछ दिनों के लिये होलीडे चाहते थे लेकिन अब जब हमारे चाहने से भी ज्यादा हमें छूट्टिया मिल गयी है तो लगता है कि वो दिन ही सही थे किसी ख्वाब को पूरा करने के लिए हम सुबह उठकर किसी काम के लिए निकलते थे और शाम होते ही घर को आया करते थे जब सोते थे तो सुकून की नींद सोते थे कि आज का दिन किसी नयी चीज को देखने और सीखने में निकल.
सुबह की चल पहल बच्चों को स्कूल जाते तो कुछ को आफिस जाते देखते थे.
कभी सुबह बस के लिए भागते थे .
"दोस्तों
'समय बीत जाने में वक्त नहीं लगता ,
सुबह से शाम तो हर दिन होती है
लेकिन अपनों का साथ छूट जाने
में वक्त नहीं लगता,
कोई मजिलं पाने में मुसफिर बना जाता
तो किसी की नीयत बदलने में
वक्त नही ं लगता,
किसी ने सच ही कहा है
भीड़ से अलग जो निकल
गया मजिलं पा लेने के
एक 👣 और वो आगे
बढ़ गया.
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