भूख से मर रहे लोगों के पास क्या केवल एक ही रास्ता है अब पलायन?
कोरोना वायरस का कहर दिन चढ़ते बढ़ते जा रहे है लेकिन क्या इसमें हमारी जिम्मेदारी ये नहीं बनती कि हम ऐसे लोगों के बारे में सोचों जो कि भूख और पैसे के अभाव के कारण पलायन कर रहे हैं .
हम सब को ये लोग बहुत बुरे लग रहे हैं क्योंकि ये सोशल डिसटेसिंग को बिगाड़ रहे और पलायन कर रहे हैं.
लेकिन क्या हमाने कभी अनुभव किया है रात को न खाने का दर्द क्या है मंहगी चीज होने के कारण उसे न खरीदने का दर्द शायद नहीं आज हमारी परिस्थिति उन लोगो ने काफी बेहतर है जिन लोगों को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती. उस घर का परिदृश्य कुछ इस तरह का होता है
घर के सभी बर्तन बिना अन्न के सूने पड़े होते हैं घर में माँ खाना बनने का झूठा नाटक कर रही होती है और अगर उसे कही से खाने का छोटा टुकड़ा मिल जाता है तो पहले वो अपने बच्चे को बाद में वो खाती है एक बेबस पति अपनी पत्नी के जेवर बेच कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करता है.
आज कोरोना वायरस की स्थिति को देखते हुए मुझे फिल्म मदर इंडिया का वो गान याद आ गया_
" दुनिया में हम आऐ हैं तो हमें जीना ही पड़ेगा
जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा."
"आज इसके लिखने का कारण मात्र एक थाली है
कोई बार हम खाना छोड़ देते हैं और फिर उसे फेंक देते हैं आज से आप सब खुद से ये वादा करे कि थाली में उतना ही लेगें जितने की हमें भूख है".
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