जिंदगी जीने का सलीका सीखती है उमराव जान।
अपने घर से उठा ली गयी लड़की जिसने कभी भी बताशे के अलावा मीठे में कुछ न देखा हो उसे रजामा, गुलाब जामुन और नऐ तोहफे मिल जाते हैं वो करीब 13 से 14 साल की लड़की जिसकी उम्र गुडे़ गुड़िया से खेलने वाली है उसके पांव में घूघरू बांध दिऐ जाते हैं और वो उस तरफ मुड़ जाती है जहाँ हर दिन केवल जिस्मना सौदा होता है .
उस लड़की को नया नाम उमराव मिल जाता है लेकिन वो पगली वही गलती कर बैठती जो कई नाचने वाली करती " इश्क़ " और रात दिन उसी के ख्वाब में अपनी जिंदगी के सपने देखने लगती है उसके वो सपने पूरे नहीं होते जिसे वो मोहब्बत करती है वो उसे छोड़ देता है लेकिन जिदंगी के उतार चढ़ाव में उमराव जीना सीख लेती है.
इस मूवी में हर दृश्य और डायलाॅग काफी सही ढंग से पात्रों के द्वारा सजीव दिखते है.

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