तकदीर



तकदीर क्या है तेरी

मुझको न मालूम है

हौसले से ही पा सकता है 
तू  अपना मुकाम है

मालूम है तूझें 

तो फिर क्यों तू 

परेशान है? 

पूछती हुं  दुनिया से

क्या तेरा एक ही काम है

मुसाफ़िर हूँ मैं तो मंजिल का

रास्ता पूछना लोगों से

लेकिन चलना तो मेरा काम है



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