विचार


दोपहर को सोने का मजा ही अलग होता है ठीक छुट्टी के समय लेट उठने जैसा।
रोज नहीं तो कभी कभी ही अपने को  भी याद करने  का समय निकल लेना चाहिए।
किसी विषय पर लिखने और बोलने से भी ज्यादा जरूरी है उस पर पहले चिन्तन मनन कर लेना।
किसी को जानने और समझने का सबसे अच्छा तरीका है उसके व्यवहार आचरण को समझ लेना।
किसी किताब को पूरा पढा़ने से कुछ नहीं तो लिखने और समझने की शैली तो समझ आ ही जाती है।
सपने अक्सर हमें चौकने और डराने वाले होते हैं।

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