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वैश्विकरण के दौर में

 भारतीय संस्कृति - निर्मला -

वर्मा
आज के समय में हमारे पास सबसे बड़ी समस्या ये है कि हम बढ़ ते हुए वैश्विकरण में अपनी संस्कृति को भूल
 सा गये हैं आज शायद में पूछूँ कि कब आप ने किसी अपने से बिना स्वार्थ के बात की होगी या उसे उसका हाल पूछ होगा तो शायद आप इसका उत्तर न दे पाऐं। 
लेकिन इसके विपरीत में आप से ये पूछूँ कि अभी अपने सोशल मीडिया पर कितने नऐ दोस्त बनाऐ तो आपका इसका उत्तर जल्द दे देगे। 
इस विषय पर बात करते हुए मुझे लेखक निर्मला वर्मा के निबंध "आदि और अंत"  में लिखे ' वैश्विकरण के दौर में भारतीय संस्कृति' की वो बात सही लगी । 
कि भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जो अभी भी जीवित है भारत में अग्रेज आऐ ,मुगल आऐ लेकिन भारतीय संस्कृति जस के तस है इसके विपरीत दूसरी संस्कृति के मात्र अवशेष ही मिलते हैं वो खत्म होने के करीब है जब कि भारतीय संस्कृति अभी  भी जीवित है। 
"वैश्विकरण ने  एक ओर जहाँ दूर बैठे लोगो को हमारे पास ला दिया है तो वही हमें अपनों से दूर कर दिया है। "

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हम शायद भूल गए

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