कितना अजीब है न कि आज हम किसी की मदद करना तो दूर उसकी सहायता करने की भी नहीं सोचते हम केवल अपना ही मतलब देखते हैं किसी बड़े की मदद करने तो दूर किसी नन्ही सी जान की भी हम मदद नहीं करना चाहते ।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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