कहने को तो बहुत कुछ है



हमेशा  कुछ लोग ये सोचकर  चलते हैं कि अभी तो बहुत समय है आगे कुछ सीख लेगे और ऐसे कहते -कहते ही उनका समय  निकल जाता है.

इस विषय पर बात करते हुए मुझें मेरे मित्र की कही एक बात याद गयी  जो आज के संदर्भ में बिल्कुल सटीक  बैठती  है कि इंसान जितना सोचता है उसे कम ही करता है क्योंकि वो जितना सोचने में समय लेता है उतना किसी काम को करने में नहीं. 

 दुनिया में आज हर किसी की आंखों में एक बड़ा  सपना तो है लेकिन  अभी तक उसे पूरा करने के लिए उसने कोई  ठोस कदम नहीं उठाया है जिस कारण वो आज भी उसी स्थान पर खड़ा हुआ  है 'जिस स्थान पर वो पहले था'.

 कोटा में बैठे कुछ स्टूडेंट को देखकर लगता है कि इनकी जिंदगी का लक्ष्य  शीशे की तरह साफ है.

जिनके काम को देख-

" जाग तुझको दूर जाना है "

 कि कविता याद आ जाती है .

कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन अब इन तमाम सवालों के उत्तर हम सब  को स्वयं खोजने होगें.



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