जो अक्सर कम पैसे से आंके जाते हैं
दो वक्त रोटी तो वो भी खाते है
चांद पार जाने की तमन्ना नहीं होती उनकी,
वो तो केवल दो वक्त की
मजदूरी कर
जमीन पर सुकून की नींद सो जाते है
हर रोज करते हैं मेहनत कि
कुछ रूपये मिल जाए
वो कहां अलीशान घर के राजा
होते हैं
उनके आसूं ही क्यों इतने
सस्ते होते हैं ?
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