झूठी तारीफों से डरा सा लगता है
बातों का ये भवाड़र सा लगता है
तूफान तो आता ही है तबाही लेकर,
न जाने क्यों ये सच सा लगता है।
न जाने क्यों ये सच सा लगता है।
जब भी देखती हूँ शीश टूटते हुए
न जाने क्यों जिदंगी में आने वाला
एक तूफान सा लगता है।
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