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फर्क पड़ता है


जैसे आज ही की तो बात है जब मुनिया ने चलना सीखा और अब वो बहुत तेज़ दौड़ती है बिना इसकी परवाह करे कि वो गिर सकती है क्योंकि उसे अच्छी तरह मालूम है कि बचपन में उसने कई चोटे खाई जब जाकर उसे चलना आया  है

उसके माँ बाप ने हमेशा उसे हर काम करने के काबिल बनाया बिना किसी बंदिश के हमेशा उसे सीखया   है कि वो कमजोर नहीं बल्कि बहुत मजबूत है.

ताकतवर केवल वो व्यक्ति नहीं होता है जो शरीर से मजबूत हो बल्कि वो भी ताकतवर होता है जिसका आत्मविश्वास ज्यादा मजबूत हो और जो गिरकर उठना जानता हो.

इसलिए आज मुनिया  इस बात को समझ गयी है कि कमजोर या मजबूत वो व्यक्ति नहीं बल्कि उसकी सोच होती है जो व्यक्ति ये सोचता है कि वो बहुत कमजोर है वो व्यक्ति अपने दिमाग से वैसा ही बना जाता है लेकिन जो ये सोचता है कि वो बहुत बहादुर और तेज है वो ही ऊंचाई पर पहुंचता है.

इसे कुछ ऐसे समझ सकते हैं कि हाथी भले ही शरीर से बड़ा होता है लेकिन एक छोटी सी चीटी उसका बहुत कुछ बिगड़ सकती है ,

एक  छोटी सी सुई व्यक्ति  क़ो हानि पहुंचा सकती है इसलिए व्यक्ति को उसके कद और शरीर से कमजोर समझना मूर्खतापूर्ण है.

" आज के समय की हर मुनिया ( लड़की) ये भली प्रकार से जानती है कि वो क्या कुछ कर सकती है उसके पंख जहाँ चाहे वहाँ उसे ले जा सकते हैं".

 

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