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सच के साथ




आज हमें जो भी  सोशलमीडिया  और नेट पर साम्रागी परोसी जा रही है वो कितनी सही है उसका हम अनुमान भी नहीं लग सकते हैं आज के समय में हमें समझदारी से ज्यादा समझ की जरूरत है जिसका उपयोग कर हम ये जान सके कि कौन सी चीज सही है कि नहीं  ।
 जिसके लिए हमें सच, विचार और अफवाहों में अंतर करना होगा। उदाहरण के लिए राज ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री  पडि़त जवाहरलाल नेहरू है तो ये सच होगा। इसके विपरीत राम ने कहा कि भोपाल में बहुत शोर है तो ये उसका अपना विचार है वो जहाँ से आया उसके मुकाबले भोपाल में बहुत शोर है।
   अगर अफवाहों की बात करे तो रमा ने कहा कि मध्य प्रदेश की राजधानी जबलपुर होने वाली है तो ये अफवाह है।

आज हम भावना और संवेदनाओं में बहकर कोई भी फोटो, मैसेज और विडियो  को जल्दी साझा कर देते हैं हमें इन्हें साझा करने से पहले एक बार विचार जरूर कर लेना चाहिए। और अगर संदेह है तो उसे साझा नहीं करना चाहिए
आज के समय में हम सबको सब से ज्यादा चिंता इस बात की लगी रहती है कि कही हमारा पासवर्ड हैक ं न हो जाऐ उसके लिए हमें बहूत ही मजबूत पासवर्ड बनना चाहिए।
   जैसे आप अपनी जिंदगी किस को आपना आदर्श मानते हैं  उसे आप अपना पासवर्ड बनाऐ।
अब बात समकालीन में चल रहे विषय कोरोना वायरस जिसको लेकर कई अफवाह चल रही है  हमें कोरोना वायरस क्या है ये जानने की बहुत जरूरत है।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..