विचार करने की है जरूरत।



              जहाँ आज दुतीचन्द, साइना नेहवाल और  केरल के मुख्यमंत्री की   वितीय सलाह कार गीता गोपीनाथ है। जिन्हें ये साबित कर दिया है कि जुनून और मेहनत आपका लिंग नही पूछंती। 
  लेकिन आज भी  कई ऐसी जगह है जहाँ पर लड़कियों को जन्म के  पूर्व ही मार दिया जाता है । 
 एक और भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है तो वहीं दूसरी ओर लड़कियों का अनुपात लडको की तुलना में बहुत कम है। 
अभी हाल के हुये सर्वे में गुजरात और राजस्थान में लड़कियों  की संख्या लडको के मुकाबले कम है। 
जबकि इसके विपरीत केरल में लड़कियों की संख्या लडको से अधिक है।
2001 की जनगणना के अनुसार हर हजार लड़को में 927 लड़कियां थी  वहीं 2011 में हर हजार लडकों पर 943 लड़कियां थी । 

अभी हाल ही में
UNICEF  लैगिक अनुपात
 को लेकर रैक जारी की है।जिसमें 195 देश में भारत की 41रैक  है। यानी भारत अभी 40 देश से पीछे है।
 भारत को अभी इसमें और सुधार करने की जरूरत है।
   

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