भूल चुके हैं क्या हम?.


आज जब प्राथमिकता की बात करते हैं तो हमारे सामने ये प्रश्न उठता है कि हमारी जिंदगी की क्या प्राथमिकता है और वास्तव में  आज हम किन चीजों पर जोर देने लगे हैं.

जरा गौर कीजिए मेरी इस सवाल का कि जब हम फोन पर कोई भी काम कर रहे होते हैं तो हम बाकी सारी चीजों को भूल कर अपना ध्यान केवल फोन पर ही लगाते हैं फिर चाहे कितना  भी लोग हमें चिल्ला ले या कुछ कहे हम उस पर ध्यान नहीं देते किन्तु वहीं उसके विपरीत अगर  हम कुछ पढ़ रहे ऐसा कोई काम कर रहे जिसे करना शायद हमारी मजबूरी है तो हमारा ध्यान उस पर नहीं लगता .

इसका एक कारण जो स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि आज हमारी प्राथमिकता पहले से बहुत बदल गयी है .

** आज समकालीन समय में जब हमें ये लगता है कि हम दूसरे व्यक्ति से बहुत समझदार है तब हमें इस चीज का जरूरी अनुमान लगाना चाहिए कि आज क्या हम जिन चीजों को प्राथमिकता देते हैं क्या सच में  वो हमारे लिए इतनी जरूरी है **.

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