मधुबाला जो जिनकी खूबसूरती के कायल आज भी लोग है जिनकी तरह आज भी हर लड़की को खूबसूरत बनने की तमन्ना है किन्तु बहुत कम ही लोग ये जानते हैं कि उनकी जिंदगी उतनी ही संघर्ष भरी थी उनके पिता उन पर बहुत पाबंदी रखते थे उनकी शूटिंग से लेकर उनकी मूवी के रिलीज तक उन्हें समय की पाबंदी में रहना पड़ता था उनकी खूबसूरती ही उनके लिए एक श्राप सी बन चुकी थी जहाँ हर कोई मधुबाला को अपना बनाना चाहता था किन्तु मधुबाला केवल दिलीप कुमार को चाहती थी उनका दिल केवल उनके लिए धड़कता था किन्तु दुर्भाग्य पूर्ण रहा कि उनका विवाह दिलीप कुमार से नहीं हुआ . उनकी फिल्म मुगले आजम को सबसे ज्यादा लोग पसंद करते है किन्तु उनके दर्शकों को ये बात नहीं मालूम की उन्हें जो जंजीर पहनाई जाती है वो असली होती है जिसके कारण उनको बहुत तकलीफ भी सहनी पड़ती है चलती का नाम गाड़ी , अमर (1954) मुगले आजम (1960) , काला पानी ( 1958) , महल (1949) उनकी मुख्य फिल्म है रहस्यमयी सुंदरता ,जिसने दर्शकों को दीवाना बना लिया उस मधुबाला का जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था जिनका हिन्दी सिनेमा में अविस्मरणीय योगदान है जिन्होंने "मुगले आजम " जैसी मूवी की है।
फिल्म मुगले आजम में अनारकली का किरदार निभा रही मधुबाला को कौन भूल सकता है।
अनारकली और सलीम की प्रेम कहानी भले ही अधूरी रह गयी।
लेकिन आज भी हिन्दी सिनेमा में इनके प्रेम को याद किया जाता है।
शेक्सपियर द्वारा रचित "रोमियो जूलियट" को कौन भूल सकता है।
अंग्रेजी में रोमियो जूलियट की प्रेम कहानी रोमाच पैदा करने वाली है।
वर्तमान समय में जब लोग प्यार करना तो सीख लेते हैं पर निभाना नहीं
बेपनाह इश्क क्या होता है। ये हमें बताती है.
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