अक्सर लोग अपने काम तो याद रखते हैं लेकिन वो उसके लिए की गई मेहनत को याद रखना भूल सा जाते हैं जिस कारण कई बार उन्हें परेशानी होती है अभिताभ बच्चन एक फिल्म के संवाद में कहते हैं कि "इंसान को अपनी औकात कभी नहीं भूलनी चाहिए " यहाँ पर उनका अर्थ इसे जो भी किन्तु आज के संदर्भ में इसका अर्थ अपने किए गए परिश्रम से है
हमारी जिंदगी में दो तरह के बदलाव आते हैं एक वो जो समय के साथ आते है दूसरे वो जिन्हें हमें जरूरी तौर पर लाना होता है.
एक अच्छी शुरुआत के लिए बदलाव जरूरी माना जाता है किन्तु वो बदलाव सकरात्मक हो तब ही उसमें श्रेष्ठता होती है
आज हम अपने किसी नए काम को करने के लिए स्वयं को ये झूठी दिलासा दे रहे हैं कि समय के साथ हम सब कुछ सीख लेगें जबकि इसकी सच्चाई ये है कि जब तक हम स्वयं से ये न समझ लेगें कि हम इस काम में कच्चे हैं तब तक हम अपना श्रेष्ठ नहीं दे पाएगें .
आज फिर क्यों?
हम किसी बेहतर काम को करने के लिए खुद से जी चुरा रहे हैं .

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