आज की सचाई

" इस जमाने में बड़ा कैसे बनूँ इतना छोटापन मेरे बस का नहीं" आज के समय जब हमें हर दिन ये लगता है कि हमें कुछ नहीं आता हम खुद को बहुत छोटा समझने लगाते है उनके लिये उर्दू कविकार वासिम जी की ये पक्ति बहुत सही है । वैश्वीकरण के समय में आज हम दूसरो को हमसे ज्यादा जानकर समझने लगते है और खुद को कमजोर मनाने लगते है यकिन मनिये मेरी इस बात का कि इस धरती पर ईश्वर ने सभी को एक न एक ऐसी खूबी दी है जिसका उपयोग कर वो खुद की पहचान बना सकता है। मैं उन लोगो का उत्साहवर्जन करना चाहूंगी जो आज इस भागते हु़ये दौर में खुद को कमजोर समझने लगे है । दोस्तो हर दिन खुद को कम आंकने की वजाऐ खुद की खूबी को बढ़ाईऐ। "विक्राम साराभाई के कथन अनुसार दूसरो से स्वयं की तुलना करने की वजऐ अपनी प्रतिभा को बढ़ाने की कोशिश करे।"

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