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आज की सचाई

" इस जमाने में बड़ा कैसे बनूँ इतना छोटापन मेरे बस का नहीं" आज के समय जब हमें हर दिन ये लगता है कि हमें कुछ नहीं आता हम खुद को बहुत छोटा समझने लगाते है उनके लिये उर्दू कविकार वासिम जी की ये पक्ति बहुत सही है । वैश्वीकरण के समय में आज हम दूसरो को हमसे ज्यादा जानकर समझने लगते है और खुद को कमजोर मनाने लगते है यकिन मनिये मेरी इस बात का कि इस धरती पर ईश्वर ने सभी को एक न एक ऐसी खूबी दी है जिसका उपयोग कर वो खुद की पहचान बना सकता है। मैं उन लोगो का उत्साहवर्जन करना चाहूंगी जो आज इस भागते हु़ये दौर में खुद को कमजोर समझने लगे है । दोस्तो हर दिन खुद को कम आंकने की वजाऐ खुद की खूबी को बढ़ाईऐ। "विक्राम साराभाई के कथन अनुसार दूसरो से स्वयं की तुलना करने की वजऐ अपनी प्रतिभा को बढ़ाने की कोशिश करे।"

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..