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छोटे छोटे सुख

कितना अच्छा लगता है आज भी भीड़ के साथ चलना छोटी - छोटी बातों पर खुश होना । किसी प्रोग्राम में अगर गये है तो सीट मिलने पर खुश होना। आज हम बहुत कुछ पाने के चक्कर में इन छोटी खुशी को भूला सा गये है। मुझे इस विषय पर बात करते हुये लेखक रामदरश का निबंध 'छोटे -छोटे सुख 'याद आया। जिसमें उनके निबंध की वो लाईन "मैं छोटा हूँ छोटा आदमी ही बना रहना चाहता हूँ।" मुझें भीड़ में जाना पसंद है लोगो के बीच चाय पीना पसंद है और ऱोज सुबह चायवाले के पास अखबार पढ़ना पसंद है। मैं बहुत बड़ा आदमी नहीं बना चाहता जिस कारण से लोग मुझें बड़ा आदमी कहकर पुकारे । मैं कहीं जाऊं तो लोग मुझे चाय नाश्ता दे जहां मुझें नहीं बुलाया गया हो वहां में नहीं जाऊं। चौबीसो घंटे मीडिया की मुझ पर नजर हो, मेरा उठना बैठाना सब सार्वजनिक हो। मुझे उनके इस निबंध ये पंक्ति बहुत सही लगी कि मे़ैं अपने काम का स्वयं उतरदायी हो। कोई भी छोटा काम जैसे बस में सीट मिलने पर खुश हो जाऊं।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..