खुद को बदलने की जरूरत है
क्यों सोचे की हम कमजोर है
अब तो गिरकर सम्भालने की
जरूरत है।
ख्वाहिश है जिन्हें पूरा करने की
उन्हें अब पूरा करने की जरूरत है
क्यों सिर नीचा कर चले
अब सिर उठाकर चलने की
जरूरत है ।
जो लोग हमें कमजोर समझते
उन्हें बताने की जरूरत है
हर परिस्थिति में जो करती काम
उसे डरने की क्या जरूरत है ?
वो पुरानी सोच नहीं जिसमें
औरो के सामने सिर झुकाने
की जरूरत है ।
क्यों दूसरो के लिये सोचकर
हम अपने सपनो को मारे।
बदल है जमना
अब तो तुझे भी बदलने
की जरूरत है ।
जहां गलत हो वहां आवाज
उठाने की जरूरत है ।
मंहगे तुम हो तो सस्ते हम भी
नहीं, अब समाज को
आईना दिखाने की जरूरत है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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