अक्सर जब हमें एक दम से कोई काम करने के लिए आ जाएं और उसकी भी शर्त हो कि उसे समय पर पूरा करना है.
ऐसे समय में हमारे धैर्य की परीक्षा होती है और अक्सर लोग ऐसी दौड़ में खुद को रखने से पहले ही हार स्वीकार लेते है और उसे नहीं करते दूसरे वो लोग होते हैं जो इस चीज को लेकर हां कर देते हैं कि कुछ नहीं तो समय के साथ अपने काम की क्षमता का तो पता चलेगा.
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक जो बहुत आशावादी होते हैं और दूसरे जो यथार्थवादी होते हैं वो हर चीज के लिए सपना नही देखते बल्कि वो चीजें जैसी है उसे वैसे ही करने को सोचते हैं हर परिस्थितियों में वो काम करते हैं
समकालीन समय में हमें आशावादी से ज्यादा यथार्थवादी होना होगा क्यों कि अब समय कल्पनाओं का नहीं बल्कि वास्तविक रूप से जीवन जीने का है.
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