इतना भी कमजोर मत हो जाना कि बात -बात पर रोओ इतना भी मजबूत मत हो जाना कि रो ही न सको.
सबसे मुश्किल होता अपनो में ये भेद करना किसका साथ दे किसका न दे.फिक्र करते है न जिनकी हम उनसे ज्यादा लडते झगडते है "जिंदगी की रेस में हर कोई भाग रह है पर फर्क तो इसे पडता हैं कौन इसमें लगातार लगा हुआ है और कौन इसे बीच में ही छोड देता है. "बडा मुश्किल है किसी एक को चुनना जब एक आपकी आत्मा तो दूसरी आपकी जान हो."दर्द तब ज्यादा नहीं होता जब आपके शरीर में दर्द हो बल्कि तब होता है जब आपके अपने दर्द में हो."हम दूसरो को उतना ही गलत कहे जितना हम सुनाने की ताकत रखते है.
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