कविता का सार

आज मैने के इग्लिश कविता पढ़ी जिसकी पंक्तियो ने मेरे साथ - साथ कई लोगो के उत्तर दे दिये कि अगर तुम जोखिम लेते हो और लोग तुम पर हंसते है तो वो लोग उस फूल के समान होते है जो फूल होने के बावजूद खुशबू नहीं फैलाते।
हमें जीवन में जोखिम लेना चाहिये  ।
मैने हिन्दी के कवि आचार्य रामचन्द्द शुक्ल का एक निबंध पढ़ा था जिसमें उन्होने एक बहुत अच्छी बात कही थी कि अगर तुम प्रयत्न करते हो और उसमें तुम सफालता प्रात्त नहीं करते तो तुम्हें इस बात का तो सुकुना रहेगा कि तुमने प्रयत्न किया क्योकि तुमने उस दौरना अनुशासन पूर्ण जीवन जिया।

  •  ये कविता जो जोखिम पर लिखी गयी है उसमें एक बहुत अच्छी बात कही गयी है कि जोखिम लेने वाले व्यक्ति  के हाथ भले ही सफालता न लगे फिर भी वो भीड़ से अलग होगा और एक मुकाम पर जाऐगा ।


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