बहुत पहले मैंने एक' प्रेरक प्रसंग' पढ़ा था जिसका शीर्षक तो मुझें याद नहीं।
उसकी कहानी ने मुझे ं बहुत प्रभावित किया। एक युवक दूसरे देश पढ़ाई करने जाता है जहाँ कि लाईब्रेरी से पुस्तक ले जाना औंर उसके पेज फाटना मना होता है एक दूसरे देश से आया छात्र एक किताब से कुछ दुर्लभ चित्र को फाट लेता है और अपने पास छिपा लेता है उसकी तलाशी लेने पर वो पकड़ा जाता है और उसके साथ -साथ उस देश से आने वाले सभी छात्र को वहाँ पढाई करने के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
जबकि दूसरे प्रसंग में एक विदेशी युवक को ताजे फलों की जरूरत होती है वो बहुत छानबीन करता है पर उसे ताजे फल नहीं मिलते हैं विदेशी युवक वहां के स्थानीय युवक से ताजे फल के बारे में पूछता है वो स्थानीय युवक उसे बड़ी दूर से ताजे सेव के फल लाकर देता है विदेशी युवा के दूूवारा सेेेव के मूल्य पूंछने पर वो कहता है कि"आप अपने देश में जाकर ये न कहना कि इस देश में ताजे फल नहीं मिलते। "
एक तरफ जहाँ छात्र की गलती से उसके साथ -साथ उसके देश को भी कलंकित होना पड़ता है वही ं दूसरी तरफ एक युवक के दूवारा दूसरे की मदद करने पर उसके साथ -साथ उसके देश का नाम भी ऊंचा होता है।
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