कल रात जेएनयू में हुयी घटना एक ही सवाल उठाती है कि क्या अपने अधिकारो की मांग करना इतना गलत है जहां किसी विश्वविघालय में घुसकर वहां के स्टूडेंट को मारा जाता है।
क्या आज अपने अधिकारो के लिये लड़ना इतना गलत है ?
इस पूरी घटना में बीस स्टूडेंट जो घायल हुये है उन की जिम्मेदारी कौन लेता है।
जामिया के बाद अब जेएनयू अखिर कब तक बेगुनाहा लोगो को यू ही मारा जाऐगा।
मै जेएनयू में हुयी इस घटना की कड़ी निंदा करती हूँ और दुआ करती हूँ जो भी स्टूडेट इस घटना के दौरन घायल हुये है वे जल्द से जल्द ठीक हो जाऐं और उनको न्याय मिले।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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