अक्सर हम ये देखते आऐ हैं कि बचपन से ही लड़की को ये सीखाया जाता है कि वो लड़की है उसे सब की बात सुनी होगी .
थप्पड़ मूवी एक ऐसा सवाल हम सब से पूछती है जिस पर हमने कभी ध्यान ही नहीं दिया..
१.क्या सबके गुस्सा उतारने के लिए ही एक स्त्री ही है ?
२.क्या उसका कोई सम्मान नहीं है?
" समकालीन समय में भले ही आज लोगों का ये सोचते हैं कि लड़कियां और महिलाएं पहले के मुताबिक ज्यादा स्वतंत्रता है और उन्हें हर तरह से आजादी है पर आज भी ये ' थप्पड़ न जाने कितनी लड़कियों और महिलाएं को जड़ दिया जाता है जैसे वो उनकी गुलाम है, याद रखिये मेरी इस बात का की गुस्सा केवल लड़कों को ही नहीं आता गुस्सा लड़कियों को भी आता है लेकिन वे अपना गुस्सा नियत्रिंत कर लेती है ये गुण इस पुरुष प्रधान समाज को स्त्री जाति से सीखना चाहिए."
** हर लड़की को बचपन से ही खुद का सम्मान करना चाहिए जब वो खुद का सम्मान करेगी तभी कोई दूसरा उसका सम्मान करेगा.**

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