है साथ ही साथ एक व्यक्ति के दुख को भी प्रकट करती है .
फिल्म की शुरुआत में एक व्यक्ति को एक नौकारीं मिलती
है जिसके लिए वो पैसे एकत्रित कर एक साईकिल खरीदता है.
और अपना काम करता है साईकिल के आ जाने से उसकी जिंदगी में एक ऐसी खुशी की लहर की दौड़ पड़ती है जैसे वो साईकिल न होकर कोई बेशकीमती चीज हो लेकिन उसकी ये खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रहती उसकी साईकिल एक व्यक्ति चोरी कर लेता है जिस कारण फिल्म में एक नया मोड़ आता है वो और उसका करीब पांच साल का लड़का साईकिल ढूढ़ने को निकलते हैं और फिल्म के अंत तक उसकी वो साईकिल नहीं मिलती और वो इसे दुखी होकर एक दूसरी साईकिल चोरी कर लेता है लेकिन लोग उसे पकड़ लेते हैं और उसकी बहुत पिटाई करते हैं ये देख उसका बेटा बहुत रोता है और अपने पिता को छोड़ने को कहता है व़ो लोग उसके पिता को छोड़ देते हैं और उन दोनों को बहुत भला बुरा कहते हैं.
Language Itallan
Time 1: 29
Rating****
Directed by Vittorio De sica
" भारत में सन् 1951 से ही साईकिल का निर्माण एटलस कम्पनी के द्वारा हो रहा था जिसने भारत को उसकी जरूरत के अनुसार साईकिल दी लेकिन अफसोस 2008 में ये कम्पनी बंद हो गयी.
आज भारत में लोग साईकिल को भूल चुके है" आज हमें इस बात पर जरूर सोचना चाहिए कि.....................
"वो परिवर्तन किस काम का जो हमें विनाश की ओर ले जाता है" .


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