सम्भव है

जब कभी घर से देर निकाले किन्तु कहीं जाने के जल्दी तो छूटाती हुयी बस को पकड़ लेने का जुनून सबार हो जाता है कभी  कभी तो जिस बस के लिये जा रहे होते है वो भी छूट जाती है फिर भी विश्वास ये रखते है कि दूसरी बस जल्दी मिल जाऐगी ठीक इसी तरह अगर हम अपनी जिंदगी में सकरात्मक रहे हर चीज को सकरात्मक देखे तो हमारी जिंदगी में कुछ बदले या न बदले हमारे जीवन जीने का नजरिया जरूर बदल जाऐगा।
दोस्तो हमारे चारो तरफ नकरात्मक और सकरात्मक दोनों चीजें होती है हमें उसे किस नजरिये से देखते है ये ज्यादा मयिने रखता है।

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