सड़क पर सोता वो
कोई ठिकना क्या उसका होता
कभी भागता किसी के पीछे
कुछ पैसे के लिये
तो कभी केवल वो
सड़क पर ही सोता।
होती कितनी भी ठिठुरती ठंड
पर उसका कोई ठिकना न होता
किसी के पास होता अच्छा
बिस्तार तो कोई सड़क
पर ही सुकून की नींद सोता।
कोई ठिकना क्या उसका होता
कभी भागता किसी के पीछे
कुछ पैसे के लिये
तो कभी केवल वो
सड़क पर ही सोता।
होती कितनी भी ठिठुरती ठंड
पर उसका कोई ठिकना न होता
किसी के पास होता अच्छा
बिस्तार तो कोई सड़क
पर ही सुकून की नींद सोता।
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