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संविधान

                             

                 

            
"हे दिया जिसने बिना किसी भेदभाव के नागरिको ं को  अधिकार
बताऐ क्या है? नागरिकों के हाथ में  उनके अधिकार "
                                   भारत का संविधान
भारत का संविधान विश्व सबसे लम्बा संविधान है जिसमें  कई विशेषता है जिसमें एकल नागरिकता,संविधान का संशोधन,लिखित एवं विस्ततृ संविधान है।
भारत के संविधान 395 अनुच्छेद ,8 अनुसूचियां,22 भाग है।
  नागरिको को मौलिक अधिकार भी  दिये  गये  है।  जिनमें समता काअधिकार  ,शोषण का अधिकार  है।
भारत का संविधान नागरिको को अधिकार के साथ कुछ कर्तव्य भी देता है ।
अनुच्छेद 21 के तहत 'राइट टू एजुकेशन' का अधिकार  मिला हुआ है।
जिसके अनुसार 5 साल की आयु से लेकर 14 साल के बच्चे को मुफ्त में एजुकेशन देना हैं।
 26 नवंबर 1949
नागरिकता निर्वाचन एवं अंतरिम संसद से संबंघित उपबंधों को 26 नवम्बर 1949 को लागू कर दिया गया  शेष संविधान के तिथि 26  जनवरी         1950 से लागू हुए।
26 जनवरी 1950 को संविधान पूर्ण रूप से लागू किया गया था। जिसें आज हम' रिपब्लिक डे'कै रूप में मनाते है।
"सभी देशों के संविधान का है निचोड़"
भारत के संविधान में आयरलैण्ड से राज्य के नीति निर्देशक तत्व, अमेरिका से नागरिको के अधिकार, जर्मनी से आपातकाल लिया गया है।
संविधान को बनाने में डॉ  भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल , जे.बी. कृपलानी, एच सी. मुखर्जी , का अभूतपूर्व योगदान है।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..