आज आवश्यकता इस पर भी ध्यान देने की


कहते हैं कि परिवर्तन ही संसार का नियम है किन्तु जब  वही परिवर्तन वरदान से अभिशाप बन जाएं तब उसकी परिभाषा बदल दी जाती है.

आज जहाँ एक ओर पूरा विश्व कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है वही दूसरी ओर कुछ जगह पर   आपदा ने मानव का जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण बिहार और   असम की बाढ़ है जिसने  लाखों लोगों  केे सिर में दर्द कर दिया है जिससे लोगों  का जीवन संकट मे पड़ गया है.

लेकिन कुछ आपदा के लिए हम  स्वयं ही जिम्मेदार है  जिसमें पेड़ की कटाई, अवैध खनन, जैसी गतिविधियां शामिल हैं.

आज आवश्यकता  है कि एक बार   पर्यावरण को बचाने के लिए नए सिरे से उस पर ध्यान देने  की.

 


 

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