काश अभी हम बच्चे होते

काश अभी हम बच्चे होते
दिल के तो सच्चे होते,
जो बात अच्छी लगती उसे करते
जो समझ से परे होती उसे हम कभी न करते
बस होता हंसना,रोना  और मनाना
किसी की शिकायत हम कभी  न करते।
एक सिफारिश करते सिर्फ खुदा से
कि हम बच्चे ही रहते
इस दुनिया को हम न समझते।
आज तो लगता कि हम क्यों नही पूरी
 जिंदगी बच्चे ही रहते।
अपने सपनों के बारे में बचपन में
 खुला कर  के तो कहते
आज तो लगता है इस बेरुखी दुनिया को देखकर
कि "जिंदगी में केवल हम आज व्यस्त ही रहते"
न चिंता होती किसी की ओर न हम सुस्त रहते
करते घंटो काम लेकिन हम खुश तो रहते।
 "जिंदगी कभी रूलाएगी कभी हँसाएगी"
तोड़ा तू धैर्य रखना  ,तुझे
एक नया सुरज दिखाएगी ।
कहां गुम हो गयी, तेरी मस्ती
ये तुझे फिर याद दिलाएगी
"अहमियत करना अपनी जिंदगी की
क्योकि ये "जिंदगी तुझे गिरकर ही  उठना सिखाएगी  "
'इस भीड़ में तु खुद को मत खोना यहीं तुझे
नयी पहचान दिलाएगी।'

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